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Friday, December 4, 2020

IMPAA महाराष्ट्र सरकार के साथ, लेकिन शर्त रखी हिंदी फिल्मों को भी राज्य में मराठी फिल्मों जैसी आर्थिक सहायता और सहूलियतें मिलें

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई। इसी बीच हिंदी फिल्म प्रोड्यूसर्स की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संस्था IMPAA (इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का साथ देने का फैसला किया है। हालांकि, ये फैसला कई शर्तों के साथ है।

IMPAA ने महाराष्ट्र सरकार से मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में फिल्मों की शूटिंग के दौरान होने वाली गुंडागर्दी को रोकने के साथ फिल्म जगत को दूसरे उद्योगों की तरह सहूलियत देने की मांग भी की है।

खत लिखकर महाराष्ट्र सीएम को सपोर्ट दिया
इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन यानी IMPAA की प्रबंध समिति ने विचार-विमर्श करने के बाद एक पत्र महाराष्ट्र सीएम को भेजा है। जिसमें इस बात पर खुशी जताई गई है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मुंबई दौरे के बाद ठाकरे ने महाराष्ट्र को न सिर्फ फिल्म जगत का उद्भव केंद्र बताया बल्कि ये भी कहा कि फिल्म उद्योग को महाराष्ट्र में ही बनाए रखने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे।

इसके बाद IMPAA के अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने लिखा कि वे सीएम ठाकरे की उस राय से पूरी तरह सहमत है जिसमें उन्होंने मुंबई को ही हिंदी फिल्म जगत का प्राथमिक स्थान बताया है। पत्र में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे शीतोष्ण राज्यों में शूटिंग के दौरान होने वाली परेशानियों का भी जिक्र है।

IMPAA ने रखी अपनी बात
IMPAA ने शिवसेना और बीजेपी के बीच फिल्म सिटी को लेकर चल रही तनातनी के बीच अपना दांव भी खेला है। देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री मुंबई में ही पनपती रहे इसके लिए IMPAA ने कहा है कि हिंदी फिल्मों को भी महाराष्ट्र में उसी तरह की आर्थिक सहायता और सहूलियतें मिलनी चाहिए जैसी मराठी फिल्मों को मिलती रही हैं।

महाराष्ट्र में मराठी फिल्में बनाने वालों को अनुदान के साथ-साथ मुंबई फिल्मसिटी में शूटिंग के समय किराये में भी छूट मिलती है। साथ ही, IMPAA ने फिल्म उद्योग को वे सारी सहूलियतें देने की भी मांग की है जो किसी भी दूसरे उद्योग को महाराष्ट्र सरकार देती रही है।

सुरक्षा देने की भी की मांग
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सबसे अहम मसला शूटिंग के दौरान होने वाले उपद्रव का भी है। मुंबई फिल्म उद्योग में कर्मचारियों के अपने तमाम संगठनों के अलावा तकरीबन हर राजनीतिक दलों के संगठन भी बन चुके हैं, ये संगठन अक्सर कलाकारों और तकनीशियनों का हितैषी होने का दम भरते हुए शूटिंग स्थल पर पहुंच जाते हैं और शूटिंग रुकवा देते हैं। IMPAA का कहना है कि इस बारे में सरकार को विधिसम्मत कदम उठाने चाहिए और अराजक तत्वों से प्रोड्यूसर्स को सिक्योरिटी दी जानी चाहिए।

सीएम को दी ये सलाह भी
पत्र में एक अहम मुद्दा सरकारी विभागों के बीच अहं के टकराव के चलते बाधित होने वाली शूटिंग का भी है। ये आम बात है कि मुंबई के किसी सार्वजनिक स्थल पर शूटिंग करना बहुत मुश्किल है। इसके लिए इतने विभागों की अनुमति आवश्यक होती है कि फिल्म निर्माता दूसरे राज्यों या शहरों में जाकर ही शूटिंग करने को सुगम मान लेता है। IMPAA ने इससे बचने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को एक सिंगल विंडो पॉलिसी शुरू करने की सलाह भी दी है।



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IMPAA came in support Government of Maharashtra but said Hindi films should also get financial assistance and facilities like Marathi films in state


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